मंगलवार, 3 फ़रवरी 2009

प्यार...यानी आत्महत्या...हत्या...बलात्कार

प्रिय मित्रों! क्या है प्यार??? क्या हो रहा है प्यार के नाम पर? अजी फिल्मवालों ने हमारा मनोरंजन करने के बहाने युवाओं को प्यार का जो पाठ पढ़ा रहे हैं उसके गंभीर परिणाम आपके सामने है। युवाओं को बिगाड़ने के लिए फ़िल्म और टीवी कम पड़ गये तो लोगों ने विदेश से "VALANTINE DAY" आयात कर लिया। आइये हम ख़ुद देखें प्यार का हस्र...



ImageChef Custom Images ImageChef.com - Custom comment codes for MySpace, Hi5, Friendster and more आत्महत्या

बलात्कार और यौन शोषण

हत्या






शनिवार, 31 जनवरी 2009

होशोहवास के पाठकों को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं!!!

प्रिय मित्रों! आपको बसंत पंचमी की प्यार भरी ढेर सारी शुभकामनाएं!!! पंचमी पर पाँच तस्वीरें आपके लिए--











क्या आपको हमारा पोस्ट अच्छा लगा??? अगर हाँ , तो "होशोहवास" के prashanshak baniye न...


बुधवार, 28 जनवरी 2009

तस्वीरें बोले..सुन..सुन...सुन...

प्रिय साथियों! सिगरेट पीना हानिकारक है ये तो सब जानते हैं। हाँ...जब आदमी बेहोश हो तो क्या कहना! हम इस बार ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे, जो कुछ कहेंगे ये तस्वीरें कहेंगे... हम बस आपको किसी के addicted होने से बचाना चाहते हैं क्योंकि.....





































सोमवार, 26 जनवरी 2009

अगर करना है प्यार तो...

प्रिय मित्रों! आप सबको गणतंत्र दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं!!!
आइये गणतंत्र दिवस के इस पावन बेला में इस कविता में पिरोये संदेश को जीवन में उतारकर सिर्फ़ दो दिन (१५ अगस्त और २६ जनवरी) का झूठा देशभक्त नहीं बल्कि हमेशा का सच्चा देशभक्त बनें:----
-----------------------------------------------------------------
अगर करना है प्यार तो...
क्षुद्र तन से नहीं, वतन से करो
वतन के जन-जन से करो
देश कर सके तुम पर गर्व
तन-मन-धन से, सच्चे समर्पण से करो.

अगर करना है प्यार तो...
चाँद की चांदनी, सूरज की रोशनी से करो
पेड़, पानी, पवन से, धरती-गगन से करो
घुट-घुट कर कहीं दम न तोड़ दे
तुम अपने पर्यावरण से करो.

अगर करना है प्यार तो...
बड़ी कठिनाई से मिले इस जीवन से करो
जीवन के बहुमूल्य एक-एक क्षण से करो
भूलकर भी कभी खुदखुशी का विचार न आए
निराश-हताश-उदास तुम अपने मन से करो.

अगर करना है प्यार तो...
अपने माता-पिता-गुरु भाई-बहन से करो
मजदूर, किसान, संत और सज्जन से करो
ताकि जिंदा बची रहे हमारी संस्कृति
बाइबिल, कुरान, गुरुग्रंथ, रामायण से करो.

अगर करना है प्यार तो...
जो कह दिया उस वचन से करो
अपने मेहनत और लगन से करो
सोचो कैसे बने देश-दुनिया सुंदर और सुंदर
तुम अपने इस चिंतन-मनन से करो.

रविवार, 25 जनवरी 2009

देशभक्ति का पाखंड!!!

"ओये सरजी, मन में गंदे-गंदे विचार आते हैं. "आने दे पुत्तर, गंदे विचारों को कौन देखता है. बस तुम्हारे कपड़े गंदे न हों, जूते-मौजे साफ़-सुथरे हों, इसका ध्यान रखना." "सरजी, मेरे मन में कभी-कभी यह विचार भी आता है की गाँव-गाँव की हमें फेरी लगानी चाहिए." "पुत्तर! २६ जनवरी और १५ अगस्त की सुबह प्रभात फेरी कर लिया कर."
"लेकिन सरजी! हमारा विचार था कि गाँव के कमजोर बेबस गरीब शोषित लोगों की आवाज़ बुलंद की जानी चाहिए." "अरे पुत्तर बकवास है ये सब. बस ये दो दिन झंडा फहराते वक्त चंद देशभक्ति नारों से अपनी आवाज़ बुलंद करना बहुत है.
"सरजी, अगर तिरंगे को उल्टा यानी केसरिया को निचे और हरा को ऊपर रखकर फहराने में कोई हर्ज़ है क्या?" "न...न..न...ये काम तो भूलकर भी मत करना पुत्तर. जेल की हवा कहानी पड़ सकती है."
"मगर सरजी, हम ज़िंदगी भर बहुत सारे उल्टे काम करते रहते हैं. हमें देखना चाहिए था कि बच्चे शिक्षित और संस्कारवान कितने हो रहे हैं तो हम केवल देखते हैं कि बच्चे साफ़-सुथरे पोशाकों में रहते हैं कि नहीं. बापू के सत्य और अहिंसा को भूलकर असत्य और हिंसा का पाठ पढ़ते आ रहे हैं. देश के नेता जनता की सेवा करने के बजाय स्वयं की सेवा कर रहे हैं. पुलिस रक्षक होने के बजाय भक्षक हो रहे हैं. यानी सब कुछ उल्टा हो रहा है. क्या इसके लिए कोई कानून नहीं है."

"लेकिन सरजी देश में कितने किसान गरीबी से तंग आकर आत्महत्या कर रहे हैं. कितने लाचार-बेसहारे लोग सहायता के लिए चिल्ला रहे हैं. क्या हमें उनका दुःख-दर्द नहीं सुनना चाहिए?" "छोडो भी पुत्तर! २६ जनवरी और १५ अगस्त को एक-से-एक देशभक्ति के गाने सुन लिया कर, दिमाग फ्रेश हो जाएगा. लाचार-बेसहारे का टेंशन मत लिया कर. ये तो ख़ुद देश के लिए टेंशन हैं. मरने दो इन्हें. टेंशन का टेंशन ख़ुद ही कम हो जाएगा."

"सरजी, सच्चाई और ईमानदारी खोती जा रही है. बापू और सुभाष के सपने कहीं खो गये हैं. क्या हमें कुछ नहीं करनी चाहिए?" "अरे गधे, क्या तुमने अखबार में नहीं पढ़ा था--आज़ादी का पहला झंडा जिसे नेहरू ने लाल किले पर फहराया था, मिल नहीं रहा. देश के तमाम नेता परेशान हैं के आख़िर वह पहला झंडा गया कहाँ! तू अगर देशभक्ति का कोई बड़ा काम करना चाहता है तो जा देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू द्वारा फहराए गये पहले झंडे का पता लगा....फिलहाल मुझे झंडा फहराने दे और चैन से देशभक्ति गाने सुनने दे...."

बुधवार, 21 जनवरी 2009

टीवी लादेन के आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक

टीवी पर विद्वानों-संतों के विचार:---
मुनिश्री तरुण सागर ने कहा--
"आज विभिन्न चैनलों द्वार देश पर जो सांस्कृतिक हमले हो रहे हैं वे ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादियों के हमले से भी ज्यादा खतरनाक हैं."
ओशो रजनीश ने कहा:---
"क्यों लोगों को सारा दिन टेलिविज़न देखना जरूरी है? इसके मनोविज्ञान में झांकना होगा. ये लोग स्वयं के सम्बन्ध में बस कुछ भी जानना नहीं चाहते हैं. ये लोग टेलिविज़न देखने में स्वयं से बचने का प्रयास कर रहे हैं."
नील पोस्टमन ने कहा:---
"टीवी गंभीर मसले को भी मनोरंजन के थाल में सजाकर परोसता है, क्योंकि यह उसके स्वभाव में निहित है. "
कानन झिंगन ने कहा;----
"ख़ुद शाम को पैर फैलाकर लगातार टीवी देखेंगे पर उम्मीद करेंगे कि बच्चे दूसरे कमरे में जाकर पढ़े. पढने का आदर्श पहले ख़ुद को बनाना पड़ता है. "
अखंड ज्योति पत्रिका ने कहा---
"टीवी धारावाहिक वह दिखाने लगे, जो भारतीय संस्कृति का परिचायक नहीं है, पश्चिम में जो हो रहा है, जिसमे इन सबकी खुली वकालत करने वाली बातें घर-घर पहुँच रही हैं."
एक अनाम विद्वान ने कहा:---
"खाना के कौर मुंह में हो और आँखें टीवी के हिंसात्मक दृश्यों पर हो तो तन-मन और जीवन में हिंसा का पदार्पण होगा ही. "

रविवार, 4 जनवरी 2009

क्या आप भी TELEVISIONITIS के मरीज़ हैं?

@टीवी पर दिखाए जा रहे फिल्मों एवं सीरियलों के झूठे, मनगढ़ंत और तन-मन-जीवन को दूषित करने वाली कहानियो को सच्ची मानकर इन्हीं के अनुरूप जीने लगना.
#टीवी पर विज्ञापित वास्तु पर जरुरत से अधिक विश्वास करना और सिर्फ़ इन्हीं वस्तुओं को खरीदना और उपयोग करना.
@सीरियल और फ़िल्म के नट-नटीनियों और क्रिकेट खिलाड़ियों को भगवान्, अपना रोल मोडल या कोई अजूबा आदमी मानने लगना.
#टीवी-सिनेमा के कलाकारों की नक़ल उतारते हुए ख़ुद भी और अपने बेटे-बेटियों के द्वारा भी वैसे ही कपड़े और फैशन को अपनाना.
@अपने बेटे-बेटियों को फिल्मी जोकरों की तरह रिकॉर्डिंग डांस और फिल्मी गाने सिखवाने की जूनून सवार होना.
#पति-पत्नी के बीच रोज-रोज झगडे एवं विवाद होना.
@अपने बच्चों के शिक्षा एवं संस्कार देने के प्रति लापरवाह होना.
#पति या पत्नी या फिर दोनों का विवाहेतर सम्बन्ध रखना.
@स्कूल-कॉलेज जाने वाले लड़के-लड़कियों द्वारा एक-दूसरे को फिल्मी हीरो-हिरोइन समझते हुए प्यार का चक्कर चलाना और चोरी-छिपे देह-मिलन का खेल खेलना.
#घर में कैदी की तरह बंद होकर दिन-रात टीवी से चिपके रहना और अपने बच्चों में भी टीवी देखने की आदत डालना.
@अपने पड़ोसियों से ज्यादा फ़िल्म-सीरियल के कलाकारों के बारे में जानकारी रखना.
#सुंदर-सुहावने प्राकृतिक दृश्यों को देखने के लिए कभी घर से बहार न निकलना. दिन-भर बस टीवी के विभिन्न चैनलों के नकली प्राकृतिक दृश्यों को देखकर ही संतोष कर लेना.
@सिगरेट, शराब एवं कोल्ड ड्रिंक पिने की आदत का लगना.
#बच्चों का पढ़ाई-लिखाई में रूचि न लेकर फ़िल्म और सीरियल देखने में अधिक रूचि लेना.
@घर-बाहर, स्कूल-कॉलेज, चलती बस या ट्रेन में, विभिन्न सभा-सम्मेलनों में लोगों का आपस में गप्प लड़ाने का विषय फ़िल्म, सीरियल या क्रिकेट का होना.
#बच्चों का छोटी उमर में बड़ी-बड़ी बातें karna.हिंसा-अपराध की घटनाओं में दस से बीस साल के बच्चों का शामिल होना.
@कमर दर्द, मोटापा, तनाव, आँख सम्बन्धी रोग, अस्थमा, पीठ दर्द आदि rogon से grasit होना.
जरा TELEVISIONITIS के इन LAKSHANON पर गौर FARMAIYE.