सोमवार, 13 जुलाई 2009

क्या आप भी इसकी गिरफ्त में हैं???















पारिवारिक संबंधों में ज़हर घोलते--- सीरियल
अपराध-अश्लीलता का पाठ पढ़ाती---फिल्में
तन-मन-जीवन को बीमार बनाते--- विज्ञापन
सांस्कृतिक मूल्यों को ध्वस्त करते---प्रोग्राम
कीमती समय को निगलते खेल बनाम व्यापार---क्रिकेट प्रसारण

वीभत्स आपराधिक घटनाओं को मनोरंजन बनाती---खबरें
क्या आप इसे "सूचना-शिक्षा-मनोरंजन" कहेंगे???
जरा सोचिये...
टीवी देखकर टाइमपास करना कितना खतरनाक हो सकता है!!!

रविवार, 5 जुलाई 2009

इन्टरनेट की माया अपरम्पार है भइया!!!

इन्टरनेट! इन्टरनेट!! इन्टरनेट!!! हर तरफ़ इन्टरनेट की धूम। हर शहर और गाँव इन्टरनेट की गंगा में उछलने- कूदने के लिए बेताब है। इन्टरनेट कैफे एक नए उत्तर आधुनिक व्यवसाय के रूप पैर पसार रहा है। मुन्ने और मुनियाँ घर से स्कूल-कालेज या फिर ट्यूशन या दोस्त मिलने के बहाने निकलकर किसी न किसी कैफे में घुस जाते हैं और इन्टरनेट बाबा की शरण में आकर अपना सुध-बुध खो बैठते हैं। घर-घर में भी इन्टरनेट कनेक्शन लिए जा रहे हैं। और अब भारत में थ्री-जी सेवा के तहत मोबाइल तक इन्टरनेट को और व्यापक रूप में लाने के लिए प्रयास हो रहे हैं।
फिर शुरू होता है- इन्टरनेट पर नए-नए विपरीत-लिंगी दोस्त बनाने का सिलसिला। ई-मेल और चैटिंग और अपने तस्वीरों का आदान-प्रदान खूब धकधक चल रहा है! घर में कहीं पति महोदय देशी-विदेशी प्रेमिकाओं के चक्कर में पड़े हैं तो कहीं पत्नी साहिबा किसी प्रेमी के चक्कर में फंसकर अपने घर-परिवार को तहस-नहस कर रही हैं।
इन्टरनेट पर हर चीज की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। इन्टरनेट पर अश्लील तस्वीरों की वेबसाइट की भरमार है मगर किसी की क्या मजाल जो इस पर रोक लगा de . आज इन्टरनेट पर नशीली दवाओं के व्यापार फल-फूल रहे हैं। जुए का नया धंधा खूब चल रहा है और वह भी बेरोक-टोक। यहाँ प्रस्तुत कुछ अखबार की कतरनें---




साभार: हिन्दुस्तान



रविवार, 28 जून 2009

सावधान! बच्चे वयस्क हो रहे हैं.....

"अपहरण" फ़िल्म देखकर अपहरण की योजना


साभार: प्रभात ख़बर

सिनेमा में हत्या=हकीकत में हत्या!!!



साभार: हिंदुस्तान

हर छोटे -बड़े शहर में सिनेमाघर। घर-घर और झोपड़पट्टी तक में टीवी नाम का छोटा सा मगर एक खतरनाक कृत्रिम प्राणी मौजूद है. टीवी---जो बंद रहने पर बड़ा ही मासूम नजर आता है, परन्तु जब खुलता है तो छोटे-बड़े सबकी बुद्धि पर ताला पड़ जाता है.
आज टीवी और टीवी पर चलने वाला सिनेमा मासूम बच्चों को वयस्क बना रहा है. टीवी पर खुल्लमखुल्ला जो अपराध, हिंसा, सेक्स और अपसंस्कृतियों को परोसे जा रहे है, वे बच्चों को उनकी आयु से पहले ही वयस्क बना रहे हैं।
फ्लोरेंस विश्वविद्यालय के अनुसन्धानकर्ताओं के भी यही विचार हैं. २००४ में छः से बारह वर्ष के लगभग ७४ बच्चों पर किये गए एक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि रोज करीब तीन घंटे टीवी देखने वाले बच्चों में परिपक्वता के लक्षण ज्यादा आसानी से देखे जा सकते हैं। जब इन्हीं बच्चों को ७ दिन तक टीवी देखने से वंचित कर दिया गया तो सभी के शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन की मात्र बढ़ने लगी. यह हार्मोन बच्चों में शारीरिक परिपक्वता के बढ़ते ग्राफ को थामता है. टस्कन शहर के कैवरिग्लिया में कराये गए एक अध्ययन से पता चला है कि जो बच्चे टीवी, कंप्यूटर या विडियो नहीं देख पाते है उनमे मेलाटोनिन हार्मोन बहुत तेजी से बढ़ते हैं.
आज जिस तरह देश और दुनिया में बच्चों का अपराध, हिंसा और सेक्स में लिप्तता बढ़ रही है, ये अध्ययन सही सिद्ध हो रहे हैं। २००५ में झारखण्ड के देवघर शहर में तीन छोटे-छोटे बच्चो ने महावीर नाम के एक बच्चे को चाकू से गोदकर हत्या कर दी. इन बच्चों ने पुलिस को बताया कि सिनेमा में तो हत्या करने पर अपराधी को पुलिस नहीं पकड़ती है. मतलब सिनेमा के हिसाब से हत्या एक सामान्य कार्य है, जिसके लिए कोई सजा नहीं दी जाती है. और मतलब यह भी कि टीवी और सिनेमा आहिस्ता- आहिस्ता बच्चों के दिमाग में घोर आपराधिक कृत्य को भी सामान्य घटना के रूप में स्थापित कर देती है.
हाल में ही बिहार की राजधानी पटना की पीसी कालोनी से एक नौ साल के बच्चे सत्यम का अपहरण कर गला घोंटकर हत्या कर दी गई। घटना को अंजाम उसी के पड़ोस के दो नाबालिग़ लड़कों ने दिया. ये दो लड़के अविनाश और खुर्शीद ने पुलिस को अपने बयान में बताया हैं कि उन्होंने "अपहरण" फिल्म देखकर अपहरण की योजना बनायी थी.
अब वक़्त आ गया है कि हम अपने बच्चों को नकारात्मक फिल्मों और धारावाहिकों को देखने से रोकें. सरकार को भी अपराध, हिंसा और सेक्स परोसने वाली फिल्मों और धारावाहिकों पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए.

रविवार, 31 मई 2009

इन्टरनेट और कंप्यूटर की ऐसी लत!!! राम-राम!!!





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सभी तस्वीरें गूगल और फ्रेंड्स १८ डॉट कॉम से साभार

गुरुवार, 21 मई 2009

जरा ये विडियो तो देखिये.....

यहाँ क्लिक करें और इस विडियो को देखिये....
विडियो क्लिप

यू विडियो डॉट कॉम से साभार

रविवार, 10 मई 2009

हे माँ ! तुझे नमन!!!

होशोहवास के पाठकों को मातृ दिवस के पवन अवसर पर आप सबको ढेर सारी शुभकामनाएं!!!