रविवार, 15 फ़रवरी 2009

वैलेंटाइन डे पर कुछ फोटू!!!

प्रिय साथियों! वैलेंटाइन डे पर बाज़ार और प्रेम का जूनून किस तरह हावी रहा दुनिया भर में इसे ही बताने के लिए हमने आपके लिए बी बी सी हिन्दी डॉट कॉम से ये तस्वीरें प्रस्तुत कर रहे हैं----






दिनकर ने लिखा--ऊपर-ऊपर तन संवर चुका, मन अभी संवारना बाकी है...
चीन में वैलेंटाइन डे के अवसर पर तन संवर रहा है

साभार: बी बी सी हिन्दी





कम्बोडिया में सजी थी ये फूलों की दूकान


साभार: बी बी सी हिन्दी

ये गुलाब की दूकान सजी है लन्दन में


साभार: बी बी सी हिन्दी


पानी के अन्दर प्रेम प्रस्ताव रखने का यह कैसा जूनून??? साभार: बी बी सी हिन्दी


पकिस्तान में भी वैलेंटाइन डे का सजा बाज़ार



साभार: बी बी सी हिन्दी
अहमदाबाद में कार्ड की दूकान पर महिलाएं


साभार : बी बी सी हिन्दी

विरोध के बावजूद वैलेंटाइन डे कार्ड की दूकान पर भीड़




साभार: बी बी सी हिन्दी








क्या यह सच है?????

प्रिय पाठकों! काफी दिनों से मोहल्ला ब्लॉग चर्चित रहा है। इस ब्लॉगर की असलियत कितना सही है और कितना झूठ ख़ुद तय कर लें क्योंकि मैं स्वयं इस ब्लॉग का पाठक रहा हूँ और उन पर यह आरोप पचा नहीं पा रहा हूँ। कृपया यहाँ क्लिक करें और १४ फरवरी की कविता के निचे की टिपण्णी पढ़ें:---

भड़ास ब्लॉग

शनिवार, 14 फ़रवरी 2009

आप भी कहेंगे वैलेंटाइन डे मुर्दाबाद!!!

प्रिय युवाओं! आपको ढेर सारा प्यार!
आप अखबारों की इन कतरनों को देखिये, पढिये। यकीनन आप भी कह उठेंगे वैलेंटाइन डे मुर्दाबाद!!!



यह ख़बर आज "दैनिक जागरण" में छपा है। लन्दन की ख़बर, कल बनेगी हिन्दुस्तान की ख़बर???

प्रेम दीवाने कहते हैं की प्रेम विवाह से दहेज़ प्रथा ख़त्म होगी। परन्तु दिल्ली की यह खबर कुछ और बयाँ कर रही है.....
यह कैसा प्रेम शादीशुदा पति और पत्नियों का जो कथित प्रेमी और प्रेमिकाओं के संग फरार हो रहे हैं?????


प्रेम करने के बहाने शारीरिक सम्बन्ध बना अपना उल्लू सीधा कर शादी से मुकरने वाले प्रेमियों की कमी नहीं...

दहेज़ हत्या और प्रताड़ना एक कारन प्रेम विवाह भी.....





फिल्मों और टीवी धारावाहिकों के प्रभाव में आकर आज के मुन्ना-मुनियाँ प्रेम के चक्कर में फरार तो हो जाते हैं, मगर रिमांड होम और जेल की हवा खाने चले जाते हैं...


नये जमाने में अब साइबर प्यार होता है और शादियाँ भी इन्टरनेट पर। मगर ये शादियाँ लोगों को ठगी के साधन बन रहे हैं...









जब प्यार और शादी हाईटेक हो रही हैं तो तलाक कैसे बाकी रहेगा भइया!!!



वास्तव में ऑनलाइन शादियाँ भी फ्लॉप हो रही हैं जनाब!!!











आत्महत्या कारन पैसे जरूर था पर असली कारन प्रेम विवाह था। घर से दोनों को निकाल दिया गया था। दोनों संघर्ष नहीं कर पा रहे थे...बीवी तंग आकर मौत को गले लगा लिया...




सर्वेक्षण बताते हैं---आत्महत्या का ३.६ प्रतिशत कारन प्रेम-प्रसंग

















प्रेम हैं हथियार वैश्यावृति बढ़ने का भी...

शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2009

यह प्यार नहीं बीमारी है...















































सच्चा प्रेम आइन्स्टीन के कथन में...

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प्रिया युवाओं! दिल से आपको ढेर सारा प्यार।

लियो टाल्सटॉय ने कहा था--अगर कोई स्वर्ग है तो प्यार ही वहां जाने का रास्ता है. ...तो क्या प्यार के चक्कर में पड़कर खुदखुशी कर रहे युवा लड़के-लडकियां जो जवानी में ही स्वर्ग सिधार रहे हैं, उन पर यह कथन लागू मान लिया जाय??? हम फिल्मी प्यार के चक्कर में पड़ गए हैं. यहाँ हम प्रस्तुत कर रहे हैं, प्रेम पर संतों और विद्वानों के विचार। आशा है हम प्रेम के सच्चे स्वरुप को समझ पाएंगे.

लियो टाल्सटॉय ने कहा---"यह कहना पूरी ज़िन्दगी आप सिर्फ़ एक को प्यार करेंग थी वैसे ही है जैसे यह कहना कि आपकी पूरी ज़िन्दगी तक एक ही मोमबत्ती जलती रहेगी।" प्रोर्तियस ने कहा---- "प्रेम में प्रत्येक व्यक्ति अँधा होता है।"अकबर इलाहाबादी ने कहा--- "खुदा महफूज़ रखे आपको तीनों बलाओं से,तबीबों, वकीलों से, हसीनों की निगाहों से।" प्लेटो ने कहा----"प्रेम एक गंभीर मानसिक रोग है।" मलूकदास ने कहा--- "सुंदर देही देखि कई, उपजत है अनुराग।MADHI न होती चाम की, तो जीवन खाते काग। "एक विद्वान् ने कहा---"प्रेम में गिरावट तब आती है, जब एक-दूसरे 'को' चाहने के बजाय एक-दूसरे 'से' चाहने लगते हैं।"

मुकेश जोशी ने "अहा! ज़िन्दगी" पत्रिका में लिखा---- "अन्दर की पटरियों पर 143 की मेट्रो ट्रेनें धकधक दौड़ रही है। 143 बोले तो I LOVE YOU. इस भागा-दौडी के समय में इतना धैर्य किसके पास है जो I LOVE YOU जैसा लंबा जुमला उछाले, इसलिए इसे भी 'अंकगणित' में बदल दिया गया और यह हो गया 143. इधर से 143 तो उधर से 143 बस हो गया प्रेम. आज बाबा कबीर होते तो अपने ढाई अक्षरों को १४३ में बदलते देख कहते---दिया कबीरा रोय."

किसी शायर ने कहा---" तुम मसर्रत का कहो या इस गम का रिश्ता,कहते हैं प्यार का रिश्ता है जनम का रिश्ता,है जनम का जो ये रिश्ता तो बदलता क्यूँ है,कोई ये कैसे बताये कि वो तनहा क्यूँ है?"हिन्दुस्तान में एक पत्रकार ने लिखा----" एक बार किसी ने फूल से कहा कितू आज तक क्यों खिलता रहा,तूने तो दी सबको खुशबूतुझे क्या मिलता रहा?फूल ने मुस्कुरा कर कहा कि देने के बदले कुछ लेना तो व्यापार है,जो देकर भी कुछ न मांगे, वही सच्चा प्यार है."
स्वामी विवेकानंद ने कहा----"प्रेम का त्रिकोण होता है--पहला कोण---प्रेम भिखारी नहीं होता. प्रेम कभी मांगता नहीं. प्रेम प्रश्न नहीं करता. प्रेम सब कुछ अर्पित कर देता है. दूसरा कोण---प्रेम भय नहीं जनता. प्रेम में भय नहीं होता. तीसरा कोण---प्रेम के लिए प्रेम. प्रेम में स्वयं अपना साध्य है. प्रेम कभी साधन नहीं बन सकता."

अलबर्ट आइन्स्टीन के कथन में प्रेम शब्द नहीं परन्तु इसकी सच्ची अभिव्यक्ति मिलती है----"मैं तो प्रतिदिन यह अनुभव करता हूँ कि मेरे भीतरी और बाहरी जीवन के निर्माण में कितने अनगिनत व्यक्तियों के श्रम का हाथ रहा है. इस अनुभूति से उद्दीप्त मेरा अंतःकरण कितना छटपटाता है कि मैं कम से कम इतना तो विश्व को दे सकूं, जितना कि मैंने उससे अभी तक लिया है." यह भी पढ़ें--VALANTINE DAY'S SPECIAL ---१

VALANTINE DAY'S SPECIAL----२
VALANTINE DAY'S SPECIAL ---३

VALANTINE DAY'S SPECIAL----४

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मंगलवार, 10 फ़रवरी 2009

ये प्रेम प्रसंग की खबरें...

सबसे पहले मैं निर्मलाजी और विष्णुजी एवं होशोहवास के तमाम पाठकों से क्षमा चाहता हूँ कि हमारा यह पोस्ट केवल शीर्षक के साथ बिना ख़बरों के प्रकाशित हो गया था. मुझे ख़ुद तब पता चला जब इसे आज देखा. खैर अब खबरों के साथ प्रकाशित हो गया है. आपको हमारा पोस्ट कैसा लगा, जरूर बताएँगे.
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साभार: दैनिक जागरण(१०/०२/२००९)


साभार: हिन्दुस्तान, प्रभात ख़बर, दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, आज



साभार: हिन्दुस्तान



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ये प्रेम प्रसंग की खबरें...