रविवार, 8 फ़रवरी 2009

प्रेम बिक रहा बाज़ार में...

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प्रिय युवा साथियों! संत कबीरदास ने कहा था-प्रेम न हाट बिकाय अर्थात् प्रेम जैसी विशुद्ध मानवीय भावना जो आम आदमी को संपूर्ण मानव जगत, जीव जगत और इश्वर से जोड़ती है, वह हाट-बाज़ार में नहीं बेचा जा सकता. परन्तु बाज़ार ने इस चुनौती को स्वीकार किया और प्रेम का एक पूरा बाज़ार खड़ा कर दिया. आख़िर बाज़ार का मूलमंत्र जो है--जो बिकता है, सो टिकता है. वैलेंटाइन डे को हथियार बनाकर मीडिया, मोबाइल कंपनियाँ और बाज़ार जगत किस तरह देश-दुनिया भर के युवाओं से पैसे ऐठने में लगा है, इसे जानने के लिए आइये चलते हैं--प्रेम के बाज़ार में.





E-CARD







गुलाब




गुलाब में छिपा चॉकलेट





वैलेंटाइन कमरा








वैलेंटाइन केक













वैलेंटाइन चॉकलेट









क्वीन ऑफ़ हार्ट













72000 अमेरिकी डॉलर में हीरा जड़ित गुलाब
















वैलेंटाइन कार
वैलेंटाइन टेडी बीयर





VALENTINE KHILAUNA
और भी बहुत कुछ है बाज़ार में------
Cakes & Chocolates
Chocolate Cakes
Chocolates Hampers
Eggless Cakes
Fancy Cakes
Fruit & Nuts Cakes
Apparels
Cosmetics & Personal Car
Cute Cameras
Electric Cookware
Even More Gifting Ideas
Express Delivery
Fashion Mobiles
Flowers Combos
Health & Fitness Product
Home & Kitchen
Home Audio/Video
Jewellery
Music Lover
Naughty Lingerie
Perfumes & Deodrants
Personalized Gifts
Soft Toys
Special Gift Hampers
Spiritual Jewellery
Sports
Trendy Laptops
Watches & Accessories








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8 टिप्‍पणियां:

  1. vah kamaal ki post hai lekin sacha prem nahi bikta ye to bajari prem hai

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  2. अच्छी जानकारी दी है आपने .../सचमुच कमाल की पोस्ट !

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  3. काफ़ी मेहनत की की ऐसी अच्छी पोस्ट लिखने में, बधाई!

    ---
    चाँद, बादल और शाम

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  4. बिलकुल ठीक कह रहे है आप। आज हमारी भावनाओ का उपयोग कर विदेशो से आयातित त्योहारो के नाम पर विज्ञापन से मिडीया और माल बेच कर व्यापारी दोनो मालामाल हो रहे है। हमारी संस्कृति तथा पाकेट दोनो पर एक साथ हमला हो रहा है। लेकिन आप और हम दोनो मिल कर बहुत कुछ कर सकते है। कोई अ-इसाई व्यक्ति अगर हमे इस प्रकार के त्योहारो की बधाई दे तो हम विनम्रता पुर्वक अस्वीकार करे तो एक बहुत बडा फरक आ सकता है।

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  5. दिन भी बाँट गये है भाई .गुलाब डे ....फलां डे....वैसे आजकल सब कुछ इश्तेहारी है ...स्कूल भी ओर बोर्नविटा भी.बूस्ट भी...ओर कोम्प्लेन भी ....तो जाहिर है ....ये लडाई व्योपार की है...

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  6. कबीर दास जी मालूम नहीं हो पाया था जी! आज होते तो जानते हैं क्या कहते:
    प्रेम तो बॉडी नीपजे,प्रेम तो हाट बिकाय
    कार्ड लाए,क्रेडिट कराए,मस्ती करे और जाए.

    बोल कबीरा सारारारा................

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  7. अनुराग जी सही कह रहे हैं-"सब कुछ इश्तेहारी है."
    कमाल की पोस्ट लिखी है आपने.

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