रविवार, 25 जनवरी 2009

देशभक्ति का पाखंड!!!

"ओये सरजी, मन में गंदे-गंदे विचार आते हैं. "आने दे पुत्तर, गंदे विचारों को कौन देखता है. बस तुम्हारे कपड़े गंदे न हों, जूते-मौजे साफ़-सुथरे हों, इसका ध्यान रखना." "सरजी, मेरे मन में कभी-कभी यह विचार भी आता है की गाँव-गाँव की हमें फेरी लगानी चाहिए." "पुत्तर! २६ जनवरी और १५ अगस्त की सुबह प्रभात फेरी कर लिया कर."
"लेकिन सरजी! हमारा विचार था कि गाँव के कमजोर बेबस गरीब शोषित लोगों की आवाज़ बुलंद की जानी चाहिए." "अरे पुत्तर बकवास है ये सब. बस ये दो दिन झंडा फहराते वक्त चंद देशभक्ति नारों से अपनी आवाज़ बुलंद करना बहुत है.
"सरजी, अगर तिरंगे को उल्टा यानी केसरिया को निचे और हरा को ऊपर रखकर फहराने में कोई हर्ज़ है क्या?" "न...न..न...ये काम तो भूलकर भी मत करना पुत्तर. जेल की हवा कहानी पड़ सकती है."
"मगर सरजी, हम ज़िंदगी भर बहुत सारे उल्टे काम करते रहते हैं. हमें देखना चाहिए था कि बच्चे शिक्षित और संस्कारवान कितने हो रहे हैं तो हम केवल देखते हैं कि बच्चे साफ़-सुथरे पोशाकों में रहते हैं कि नहीं. बापू के सत्य और अहिंसा को भूलकर असत्य और हिंसा का पाठ पढ़ते आ रहे हैं. देश के नेता जनता की सेवा करने के बजाय स्वयं की सेवा कर रहे हैं. पुलिस रक्षक होने के बजाय भक्षक हो रहे हैं. यानी सब कुछ उल्टा हो रहा है. क्या इसके लिए कोई कानून नहीं है."

"लेकिन सरजी देश में कितने किसान गरीबी से तंग आकर आत्महत्या कर रहे हैं. कितने लाचार-बेसहारे लोग सहायता के लिए चिल्ला रहे हैं. क्या हमें उनका दुःख-दर्द नहीं सुनना चाहिए?" "छोडो भी पुत्तर! २६ जनवरी और १५ अगस्त को एक-से-एक देशभक्ति के गाने सुन लिया कर, दिमाग फ्रेश हो जाएगा. लाचार-बेसहारे का टेंशन मत लिया कर. ये तो ख़ुद देश के लिए टेंशन हैं. मरने दो इन्हें. टेंशन का टेंशन ख़ुद ही कम हो जाएगा."

"सरजी, सच्चाई और ईमानदारी खोती जा रही है. बापू और सुभाष के सपने कहीं खो गये हैं. क्या हमें कुछ नहीं करनी चाहिए?" "अरे गधे, क्या तुमने अखबार में नहीं पढ़ा था--आज़ादी का पहला झंडा जिसे नेहरू ने लाल किले पर फहराया था, मिल नहीं रहा. देश के तमाम नेता परेशान हैं के आख़िर वह पहला झंडा गया कहाँ! तू अगर देशभक्ति का कोई बड़ा काम करना चाहता है तो जा देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू द्वारा फहराए गये पहले झंडे का पता लगा....फिलहाल मुझे झंडा फहराने दे और चैन से देशभक्ति गाने सुनने दे...."

3 टिप्‍पणियां:

  1. 'छोडो भी पुत्तर! २६ जनवरी और १५ अगस्त को एक-से-एक देशभक्ति के गाने सुन लिया कर, दिमाग फ्रेश हो जाएगा'
    हो तो वास्तव में इतना ही रहा है.

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  2. बहुत अच्‍छा..............गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।

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  3. सटीक.

    आपको एवं आपके परिवार को गणतंत्र दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

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