गुरुवार, 2 अप्रैल 2009

उपलब्धियां ही उपलब्धियां !!! (व्यंग्य कविता)

किसी को जानना हो अगर

आज़ादी के बाद देश की उपलब्धियां

देश के गाँव-गाँव में घूम आइये

जहाँ भी सुनें दो जून की रोटी के लिए

किसानों-मजदूरों-गरीबों का हाहाकार

वहाँ उपलब्धियां ही उपलब्धियां !

अजी कभी देश के महानगरों का

एक चक्कर लगा आइये

आसमान को छूती आलीशान बिल्डिंग

या फिर जहाँ भी देखें

चमचमाती कारों की लम्बी कतार

वहाँ उपलब्धियां ही उपलब्धियां !

क़र्ज़ के जंजाल में फंसकर

आत्महत्या कर रहे किसानों की चिंता क्यों?

किसानों के खेत बनेंगे क्रिकेट स्टेडियम

जिन स्टेडियमों में भी देखें

क्रिकेट खिलाड़ियों को रन बनाते धुंआधार

वहाँ उपलब्धियां ही उपलब्धियां !

हम कभी घूम आयें शहर के

होटल-पार्क, रेलवे स्टेशन व सड़क-चौराहे

जहाँ भी दर्शन हो देश के नौनिहालों का

चबाते गुटखा, उडाते सिगरेट का धुंआ बदबूदार

वहाँ उपलब्धियां ही उपलब्धियां !

कभी फुर्सत में निकालिए

देश के हाट -बाजारों में

जहाँ भी बिक रहे हों

देश की बेबस लड़कियां,

क़र्ज़ में लादे गरीबों का गुर्दा,

इमानदारी, सच्चाई और प्यार

वहां उपलब्धियां ही उपलब्धियां!

कभी 'विजिट' करें देश के

अंगरेजी माध्यम स्कूलों में

पढाई-लिखाई क्या होती है राम जाने

हाँ, जहाँ भी देखें शर्ट, पैंट, टाई , बैल्ट

किताब-कॉपी का सजा-धजा बाज़ार

वहां उपलब्धियां ही उपलब्धियां!

अजीदेखना है तो देखिये

'वसुधैव कुटुम्बकम' की बात करने वाले

भारत के एक-एक समाज को

जहां भी दिखे अपने-अपने स्वार्थ के लिए

टूटता-बिखरता घर-परिवार

वहां उपलब्धियां ही उपलब्धियां!

kabhee कीजिये इस्तेमाल सूचना के अधिकार का

जिन-जिन नेता-मंत्रियों-अधिकारियों के

घर, बैंक व स्विस बैंक खातों सेउजागर हो उनका भ्रष्टाचार

वहां उपलब्धियां ही उपलब्धियां!

....और अगर कहीं घूम नहीं सकते

ज्यादा दिमाग लगाना नहीं चाहते

तो हत्या, अपहरण, लूटपाट, धरना, प्रदर्शन, हड़ताल

छेड़छाड़ और बलात्कार के पढ़ लीजिये खबर

खोलकर किसी भी रोज़ का अखबार

सचमुच, वहाँ उपलब्धियां ही उपलब्धियां!

2 टिप्‍पणियां:

  1. सचमुच वहां उपलब्धियां ही उपलब्धियां ... अच्‍छा लिखा है।

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  2. यार बताया मत करो, व्यंग्य कविता है, पढ़ने का मज़ा जाता रहता है!

    उत्तर देंहटाएं

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